ग्वालियर. पहले दिल्ली के गेस्ट हॉउस और अब लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 विद्यार्थियों की मौत के बाद ग्वालियर में निगम अधिकारियों की नींद टूटी नगर निगम का फायर अमला कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए मैदान में उतरा। लेकिन जांच के दौरान न केवल सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, बल्कि कोचिंग संचालकों को गैरजिम्मेदारी और विद्यार्थियों की जिंदगी से किए जा रहे खिलवाड़ को भी उजागर कर दिया. कोचिंग हब लक्ष्मीबाई कॉलोनी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान जब फायर विभाग की टीम धाकड़ लाइब्रेरी और वरदानी कोचिंग की ओर बढ़ी तो संचालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए कोचिंग के अंदर और बाहर से ताले जड़ दिए। उस समय करीब 100 विद्यार्थी भवन के अंदर मौजूद थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने के बजाय उन्हें जांच टीम से छिपाने का प्रयास किया गया। कोचिंग संचालकों ने कुछ विद्यार्थियों को भवन की चौथी मंजिल से समीपस्थ भवन की छत पर उतारना शुरू कर दिया। दोनों भवनों के बीच करीब तीन फीट का अंतर था। ऐसे में यदि किसी विद्यार्थी का संतुलन बिगड़ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों के भी होश उड़ गए। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कोचिंग के ताले तोड़े। इसके बाद भवन के अंदर बंद विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। विद्यार्थियों को बाहर निकालने के बाद पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया गया।
नगर निगम की जांच के दौरान विज्ञान पथ कोचिंग क्लासेस, एससीआई कृषि संस्थान, वरदानी कोचिंग क्लासेस, धाकड़ लाइब्रेरी और डीबी फिटनेस जिम में अनेक गंभीर खामियां मिलीं। संस्थानों में फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र नहीं था, अग्निशमन उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। फायर विभाग ने सभी संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की कार्रवाई की।
शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक कोचिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। अलग-अलग क्षेत्रों में सैकड़ों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या ऐसे भवनों में चल रही है जहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अधिकांश संस्थानों में न तो फायर अलार्म सिस्टम है और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था। संकरी सीदिया. एकमात्र प्रवेश-निकास मार्ग, भीड़भाड़ वाले कक्ष और अस्थायी निर्माण सामग्री किसा भी आपदा के दौरान बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। अभिभावक भी अक्सर कोचिंग के परिणाम और प्रसिद्धि देखकर बच्चों का प्रदेश करा देते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की ओर कम ध्यान देते हैं। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में सैकड़ों विद्यार्थियों की जान खतरे में पड़ सकती है.
नगर निगम अधिकारियो के अनुसार धाकड़ और वरदानी कोचिंग जिस भवन में संचालित हो रही थी, उसी भवन में लाइब्रेरी और जिम भी संचालित हो रहे थे। चार मंजिला भवन में एक साथ कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित थीं। फायर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले। जाच के दौरान कुछ विद्यार्थियों को जिम में भी छिपाने का प्रयास किया गया। इसलिए उक्त चार मंजिला भवन को पूरी तरह सील किया गया।
यहाँ बता दें कि ग्वालियर में अनेक क्षेत्र कोचिंग गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। यहां प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी विभिन्त्र प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। इसमें सिटी सेंटर, मुरार, थाटीपुर, लक्ष्मीबाई कॉलोनी, रॉक्सी पुल क्षेत्र. लक्कड़खाना, तानसेन नगर, हजीरा, गोला का मंदिर, डीडी नगर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और आवासीय भवनों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं।

