नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में कीमतें तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने के बीच रूस कच्चे तेल के निर्यात पर छूट में कटौती पर विचार कर रहा है। मास्को के इस कदम से भारत को रूस से महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने कहा कि मास्को पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद वित्त मंत्रालय कच्चे तेल के निर्यात पर करों की गणना में सुधार के लिए और उपायों पर विचार कर रहा है। इसी कड़ी में हमने कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के निर्यात पर मौजूदा छूट को 25 डॉलर से घटाकर 20 डॉलर प्रति बैरल करने की योजना बनाई है। दरअसल, यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कच्चे तेल के निर्यात पर 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तय करने के साथ कई प्रतिबंध लगा दिए। इसने रूस को कच्चे तेल की बिक्री पर कर लगाने के तरीकों में बदलाव को मजबूर किया। रूसी वित्त मंत्री ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की करीब 80 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा कीमत पर वित्त मंत्रालय 2023 में तेल और गैस बेचकर 8 लाख करोड़ रूबल (88.5 अरब डॉलर) जुटा सकेगा। इस साल के पहले छह महीने में रूस को तेल और गैस से होने वाली कमाई में 47 फीसदी की गिरावट आई है। इसकी भरपाई के लिए वह कच्चे तेल के निर्यात पर छूट में कटौती की तैयारी में है। सिलुआनोव ने कहा कि तेल-गैस राजस्व में वृद्धि होने पर इस साल के अंत तक हमारा बजट घाटा कम होकर जीडीपी के 2.5 फीसदी तक रह सकता है।
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