नई दिल्ली । देश के प्रमुख इस्पात विनिर्माताओं का कहना है कि इस्पात की कीमत निचले स्तर तक जा चुकी है, भले ही इस साल की शुरुआत से इनमें गिरावट आ रही है। स्टीलमिंट के आंकड़ों पता चलता है कि इस्पात की चादरों के बेंचमार्क हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) के औसत मासिक दाम इस साल मार्च में 60,260 रुपए प्रति टन (मुंबई से बाहर) थे, जबकि 27 जून तक औसत मासिक दाम 55,443 रुपए प्रति टन थे, जिसमें पिछले महीने के मुकाबले गिरावट आई लेकिन कंपनियों का कहना है कि दामों में आगे गिरावट की संभावना नहीं है। टाटा स्टील के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मुझे लगता है कि दाम निचले स्तर तक जा चुके हैं। लौह अयस्क और कोयले की मौजूदा कीमत स्तर पर वैश्विक स्तर पर अधिकांश स्टील कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख कच्चे माल लौह अयस्क और कोकिंग कोयले के दाम पिछले कुछ दिनों में बढ़ने लगे हैं। जेएसडब्ल्यू स्टील और आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया का भी यही कहना है कि दामों में और गिरावट के आसार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पिछले कुछ सप्ताह में दामों में करीब 20 से 30 डॉलर प्रति टन तक की बढ़ोतरी हुई है। इसलिए अब दाम स्थिर हो चुके हैं। गिरावट रुक गई है। लंबे उत्पादों में भी यह गिरावट द्वितीयक क्षेत्र की क्षमता से कहीं अधिक रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से लंबे उत्पादों में सरिए में गिरावट आ रही है।
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