यूँ तो हिन्दुस्तान में पिछले 50 वर्षों में 35 हज़ार पुलिस के ख़ाकी वर्दी धारियों ने मुल्क के लिए क़ुर्बानी दी है , पर ये अहसास इस देश में बहुत कम लोगों को है कि एक सरकारी विभाग ऐसा भी जिसके नसीब में ना तो ताला होता है, ना छुट्टी का संडे या मंडे । पुलिस वालों के ड्यूटी के घंटे भी तय नहीं है और पता नहीं कब आधी रात को थाने से फिर ड्यूटी पर पहुँचने का बुलावा आ जाये । पुलिस के तीज त्योहार भी इसी में है कि लोगों की होली, दिवाली, ईद , वैशाखी और राखी शांति से मन जाये । पुलिस- प्रशासन पर केंद्रित इस विशेष प्रसारण में “ वाह भाई वाह “ के विश्व प्रसिद्ध प्रस्तोता शैलेष लोढ़ा ने कविताओं के माध्यम से पुलिस की इन पीड़ाओं को पुरज़ोर स्वर दिया । शेमारू टी. वी. से 31 जुलाई को प्रसारित इस कार्यक्रम में मेरी कविता “ अंतिम इच्छा “ पर आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे तहेदिल से इंतज़ार रहेगा ।”*
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